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 <title>हि. प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड</title>
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 <title>परिचय</title>
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 <description>&lt;div class=&quot;field field-name-body field-type-text-with-summary field-label-hidden&quot;&gt;&lt;div class=&quot;field-items&quot;&gt;&lt;div class=&quot;field-item even&quot; property=&quot;content:encoded&quot;&gt;&lt;p&gt;हिमाचल प्रदेष कृशि उपज विपणन एक्ट, 1969 को 05/02/1972 को कृशि उत्पाद को खरीदने व बेचने और राज्य भर में कृशि उत्पाद के बाजार स्थापित करने के लिए एक समान कानून प्रदान करने के लिए जारी किया गया जिसने पंजाब कृशि उपज विपणन एक्ट, 1961 को समाप्त करके उस एक्ट के स्थान पर हिमाचल प्रदेष प्रांत जो पंजाब रिकोगनेषन एक्ट 1966 के सेक्षन 5 के तहत प्रकाष में आया है व इसके साथ ही यह नया एक्ट हिमाचल प्रदेष के उन स्थानों पर भी लागू होगा जहां पर 01/11/1966 से पहले पटियाला एगरीकल्चरर मार्किटस एक्ट 2004 बी.के. लागू हुआ करता था।.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;डब्ल्यू.टी.ओ. जमाने के बाद विष्व भर में कृशि विपणन में कृशि उपज के व्यापार को आजाद करने के बाद बड़े बदलाव हुए। कृशक समुदाय को स्थानक व विष्व भर में नए बाजार समुदाय मुहईया करवाने के लिए यह पता चला कि अंदरूनी विपणन प्रणाली को आधुनिक, एकाग्रित व मज़बूत करने की जरूरत है। इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार, कृशि मंत्रालयाय ने एक निपुण कमेटी नियुक्त की जिसने कृशि विपणन व देष भर में कृशि विपणन को विकासित व मजबूत करने के लिए बनाई नीति और कार्यक्रमों के सम्बंध में कई बदलाव प्रस्तुत किये। निजी क्षेत्रों की ज्यादा भागीदारी निष्चित करने के लिए रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य द्वारा कृशि विपणन के ऊपर नियंत्रण को कम करना होगा क्योंकि विपणन आधारिक संरचना व सम्बंधित सेवाओं को विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत हैै। वेकल्पिक विपणन ढ़ांचे को बढ़ावा देते हुए राज्य सरकार को निजी व्यापारियों व उद्योगिक इकाईयों द्वारा कृशक/उत्पादकों को षोशण से बचाने के लिए जरूरी सुरक्षा भी प्रदान करनी पडे़गी इसलिए कृशि विपणन में नए विधान बनाने की जरूरत थी। इसलिए हिमाचल प्रदेष कृशि उपज विपणन एक्ट व बागवानी उपज विपणन (विकास व अधिनियम) एक्ट, 2005 (एक्ट संख्या 20 ऑफ 2005) को कृशि उपज में बेहतर नियंत्रण प्रदान करने के लिए, जरूरी विपणन प्रणाली के विकास के लिए, कृशि प्रसंस्करण व कृशि एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए, निजी बाजारों/क्षेत्रों को स्थापित करने के लिए, खपतकार/कृशि बाजारों में सीधी बिक्री और राज्य में कृशि विपणन में जन-निजी हिस्सेदारी की प्रबंधगी व विकास को बढ़ावा देने के लिए दोबारा जारी किया गया। यह राज्य में ठेकेपर खेती करने पर नियंत्रण व उसको नियंत्रण प्रदान करता है व उसे बढ़ावा देता है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस नियम के तहत 10 कृशि उपज विपणन कमेटी राज्य भर में स्थपित की गई। हर एक बाजार में एक प्रमुख बाजार क्षेत्र व एक या एक से अधिक उपक्षेत्र तथा वसूली केन्द्र है। एच.पी. राज्य कृशि विपणन बोर्ड ए.पी.एम.सी. के ऊपर अधीक्षण व नियंत्रण बनाए रखता है।&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;</description>
 <pubDate>Tue, 03 Dec 2013 09:04:44 +0000</pubDate>
 <dc:creator>admin</dc:creator>
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