हमीरपुर जिला राज्य के मध्य भाग का निर्माण करता है। उत्तर में यह कांगड़ा जिले से घिरा है, पूर्वोत्तर में मंडी जिले से और दक्षिण पूर्व एवं दक्षिण में क्रमश: बिलासपुर और ऊना जिलों से घिरा है। यह 76°16" और 76°43" पूर्वी देशांतर एवं 31°35" और 31°55" उत्तरी अक्षांशों के मध्य स्थित है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार इस जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1,10,070 हैक्टेयर है और भारतीय सर्वेक्षण के मुताबिक कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 1118 वर्ग किलोमीटर है।
हमीरपुर हिमाचल प्रदेश का सबसे छोटा जिला (क्षेत्रफल के अनुसार) है। प्रशासनिक लिहाज से जिले को छह विकास खंडों में विभाजित किया गया है, जिनके नाम इस प्रकार हैं: हमीरपुर, भोरांज, नादौन, बिजहरी, सुजानपुर तीरा और टौनी देवी। 1617 गांवों और पांच कस्बों को कवर करने वाली 209 पंचायतें हैं। पांच कस्बों के नाम हैं: बारसर, हमीरपुर, नादौन, बिजहरी और सुजानपुर। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 350 मीटर से 1100 मीटर के बीच परिवर्तित होती रहती है।
खरीफ मौसम के दौरान किसान आमतौर पर मक्का और धान उगाते हैं, जबकि रबी के मौसम में गेहूं बोया जाता है। सिंचित खेतों वाले कुछ किसानों का रुझान आजकल नकदी फसलों जैसे फल और सब्जियों की तरफ भी हो रहा है।
हमीरपुर जिला उप नम उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पड़ता है। सर्दियां नवंबर से शुरू होकर मार्च तक चलती हैं, वसंत अप्रैल से मई तक रहता है और जून से सितम्बर तक गर्मी पड़ती है। अक्तूबर से नवंबर मौसम में परिवर्तन का काल होता है। सर्दियों के दौरान न्यूनतम तापमान 4°C तक गिर जाता है और गर्मियों में अधिकतम तापमान 34°C तक पहुंच जाता है। औसत वार्षिक बारिश करीब 1600 मिमी होती है।
यहां एक साल में दो बार बरसात का मौसम आता है। पहला पश्चिम विक्षोभ की वजह से दिसम्बर से मार्च के दौरान आता है। दूसरा दक्षिण पश्चिमी मानसून की वजह से जून के मध्य से सितम्बर के मध्य तक रहता है, जो कि मुख्य होता है। कुछ बारिश मानसून के बाद अक्तूबर के महीने में भी होती है। बारिश का एक बहुत बड़ा हिस्सा (74%) जून से सितम्बर की अवधि में मानसून के दौरान ही आता है। जुलाई और अगस्त सबसे भीगे हुए महीने होते हैं।
दिखाए गए कुल क्षेत्रफल की तुलना में सिंचित भूमि का क्षेत्रफल 4.92 प्रतिशत था। भोरांज तहसील में सबसे ज्यादा सिंचित क्षेत्र (898 हैक्टेयर) है, जबकि बारसर तहसील में यह क्षेत्र सबसे कम (55 हैक्टेयर) है। इस जिले में सिंचाई के तीन बड़े स्रोत, उद्वहन सिंचाई, खाले और ट्यूब वेल्स एवं कुएं प्रमुख हैं।
पहाड़ी शृंखलाओं के साथ पारस्परिक रूप से मिश्रित नदियां, सहायक नदियां और नाले इस भूभाग की विशेषता है। अनेकों बंजर पहाड़ियां, छोटी पहाड़ियां और चट्टानें पूरे क्षेत्र में बिखरी पड़ी हैं। आमतौर पर 60 डिग्री तक के ढलान वाले छोटे-छोटे भू-भागों में खेती की जाती है। इन भूभागों की चौड़ाई 2 से 5 मीटर तक होती है भूभाग के अंदर भी करीब 1-3 प्रतिशत तक का ढलान होता है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 650 मीटर से 1100 मीटर के बीच परिवर्तित होती रहती है।
स्थिति
हमीरपुर जिला 76º 18' से 76 º 44’ पूर्वी देशांतर और 31º 25' से 31º 52' उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित है। शिवालिक रेंज द्वारा कवर यह भूभाग पहाड़ी है। इसकी ऊंचाई 400 मीटर से 1100 मीटर के बीच परिवर्तित होती रहती है। यहां ब्यास नदी के किनारों के आसपास लगभग पूरी तरह समतल मैदान भी मौजूद हैं तो चट्टानों की उदात्त ऊंचाइयां भी मौजूद हैं। यहां तीन प्रमुख पर्वतमालाएं हैं जो कि दक्षिण पूर्वी दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह कम ऊंचाई पर स्थित है और तुलनात्मक रूप से गर्म भी है, लेकिन कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में देवदार के जंगल भी हैं। 1972 में कांगड़ा जिले से अलग करके इस जिले का निर्माण किया गया था। सभी दिशाओं में यह सड़कों के साथ अच्छी तरह से जुड़ा है। फिलहाल यहां दिओट सिद्ध, सुजानपुर तीरा और नादौन के मंदिर सैलानियों के लिए मशहूर आकर्षण केंद्र हैं। हमीरपुर कस्बा इस जिले का मुख्यालय है, जो कि शिमला-धर्मशाला मार्ग पर पड़ता है। यहां की बहुसंख्य आबादी हिंदू है। ज्यादातर लोग पहाडी बोलते हैं। हमीरपुर हिमाचल प्रदेश का सबसे ज्यादा साक्षर जिला है। इसकी बहुसंख्य आबादी धाराप्रवाह हिंदी बोलती है। हमीरपुर जिले के उत्तरी भाग से ब्यास नदी बहती है, जबकि दक्षिणी भाग से सतलुज प्रवाहित होती है। ब्यास और सतलुज दोनों ही नदियां हिमाचल प्रदेश में काफी प्रसिद्ध हैं।
जलवायु
हमीरपुर जिला उप आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पड़ता है। सर्दियां नवंबर से शुरू होकर मार्च तक चलती हैं, वसंत अप्रैल से मई तक रहता है और जून से सितम्बर तक गर्मी पड़ती है। अक्तूबर से नवंबर मौसम में परिवर्तन का काल होता है। सर्दियों के दौरान न्यूनतम तापमान 4°C तक गिर जाता है और गर्मियों में अधिकतम तापमान 34°C तक पहुंच जाता है। औसत वार्षिक बारिश करीब 1600 मिमी होती है। यहां एक साल में दो बार बरसात का मौसम आता है। पहला पश्चिम विक्षोभ की वजह से दिसम्बर से मार्च के दौरान आता है। दूसरा दक्षिण पश्चिमी मानसून की वजह से जून के मध्य से सितम्बर के मध्य तक रहता है, जो कि मुख्य होता है। कुछ बारिश मानसून के बाद अक्तूबर के महीने में भी होती है। बारिश का एक बहुत बड़ा हिस्सा (74%) जून से सितम्बर की अवधि में मानसून के दौरान ही आता है। जुलाई और अगस्त सबसे भीगे हुए महीने होते हैं।
सर्दियों में ठंडा और गर्मियों में गर्म
जुलाई से सितम्बर तक बरसाती
कृषि
कृषि भूमि = 36,118 हैक्टेयर
दिखाए गए कुल क्षेत्रफल की तुलना में सिंचित भूमि का क्षेत्रफल 4.92 प्रतिशत था। भोरांज तहसील में सबसे ज्यादा सिंचित क्षेत्र (898 हैक्टेयर) है, जबकि बारसर तहसील में यह क्षेत्र सबसे कम (55 हैक्टेयर) है। इस जिले में सिंचाई के तीन बड़े स्रोत, उद्वहन सिंचाई, खाले और ट्यूब वेल्स एवं कुएं प्रमुख हैं।
खरीफ की प्रमुख फसलें: मक्का, धान
रबी की प्रमुख फसलें: गेहूं
